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आसाम का मूंगा और कश्मीर का क्रेप सिल्क बना आकर्षण
खेल प्रशाल में सिल्क इंडिया प्रदर्शनी का शुभारंभ
इंदौर. गुरुवार से खेल प्रशाल में सिल्क इंडिया प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ. 28 अगस्त तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में 15 राज्यों के हेण्डलूम बुनकरों की उत्कृष्ट कारीगरी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा.
प्रदर्शनी में आसाम का मंूगा सिल्क आकर्षण बना हुआ है. यह साड़ी दिखने में जिनती आकर्षक है उतनी ही भारी भी. असम से आई पूर्णिमा पाठक बताती है कि यह साड़ी पूरी हाथ से बनाई जाती है. इस कारण इसे बनाने में 15 दिन लगते हैं. महीने में केवल दो ही साड़ी बन पाती है. कश्मीर का क्रेप सिल्क भी अपनी अलग विशेषता लिए हुए है. यह दिखने में कुछ महीन है लेकिन गरमाता भी उतना ही है.
कश्मीर से आए मीर मकबूल ने बताया कि इसकी एक साड़ी बनाने में जहां 2 महीने लगते हैं वहीं सूट बनाने में 3 महीने लग जाते हैं. पश्मीना शॉल तो 4-5 महीने लेती है. आयोजक सौरभ कुमार गुप्ता ने बताया कि उड़ीसा आर्ट एण्ड क्राफ्ट समिती की ओर से इंदौर में आयोजित इस प्रदर्शनी व सेल में देश के विविध प्रांतों की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय साडिय़ों का चुनिंदा वैवाहिक संग्रह प्रदर्शित किया गया है. यहाँ प्रस्तुत हर साड़ी एवं ड्रेस मटेरियल अपने आप में अद्वितीय और मनमोहक है.
इस विषिष्ट संग्रह में आसाम से मूगा सिल्क, पश्चिम बंगाल से कांथा वर्क, तमिलनाडु से कोयम्बटोर सिल्क, काँजीवरम सिल्क, कर्नाटक से बेंगलुरु सिल्क, क्रेप और जार्जेट साड़ी, कश्मीर से टेबी सिल्क, पश्मीना शॉल, आन्ध्र प्रदेश से कलमकारी, पोचमपल्लीए मंगलगिरी ड्रैस मटेरियलए बिहार से टसरए भागलपुर सिल्क, मधुबनी प्रिंट ड्रैस, मटेरियल, राजस्थानी इंडिगो नेचुरल प्रिंट, दाबू प्रिंट बेडषीट, दोहरए सूट व ड्रैस मटेरियल, ब्लॉक हैण्डप्रिंट जयपुरी रजाइयाँ, खादी सिल्क एवं कॉटन डे्रस मटेरियल सम्मिलित किए गए हैं. प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित की जा रही है.


